सोमवार, अक्तूबर 12, 2020

ज्योतिष और उच्च शिक्षा

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ज्योतिष उच्च शिक्षा के चयन मे कैसे सहायक हो सकती है ?

 आज के समय में कौन ऐसा है जो सफलता नहीं चाहता। शिक्षा इस लक्ष्य को पाने मे बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
आज के प्रतिस्पर्धा के समय मे जब इतने सारे माधयम और विकल्प हैं तो सही चुनाव माता-पिता एवं छात्र के लिए एक चुनौती से कम नहीं है।

उच्च शिक्षा हर एक छात्र पाना चाहता हैं परन्तु उससे भी बड़ा लक्ष्य है कि परीक्षा मे अच्छे अंक आये ताकि प्रतिभा सूची मे भी उच्च स्थान आये और  आगे चलकर अच्छी नौकरी मिल सके या अपना वयवसाय भी करना हो तो सफलतापूर्वक कर पाएं।

जब लोग अपने बच्चों के विषय मे ज्योतिष के अनुसार जानकारी करना चाहते हैं तो मैने अनुभव किया हैं कि  लोग शायद ही कभी बच्चे के स्वास्थ के विषय मे प्रश्न करते हों। यहाँ तक की छोटा बच्चा जिसकी जन्म कुंडली अभी अभी बनाई गयी हैं वहां भी परिवारजन बच्चे की शिक्षा के विषय में प्रश्न स्वास्थ से पहले करते हैं या यदि ज्योतिषी खुद न बताये तो स्वास्थ के विषय मे विशेष नहीं पूछते। तो यह सिद्ध होता है की हम भारतियों के लिए शिक्षा सर्वोपरि है।

इस लेख मे मैं शैछिक स्तर पर ज्योतिष विद्या  की भूमिका पर संक्षेप में  प्रकाश डालूँगा।

ज्योतिष मे किसी भी वयक्ति का शैछिक स्तर क्या होगा यह तो पता चलता ही है साथ ही वह कितना बुद्धिमान होगा यह भी पता चलता है। यहाँ बुद्धिमान का तात्पर्य सीखने और समझने के क्षमता से है , और साथ ही स्मरण शक्ति का भी अनुमान लगाया जा सकता हैं। इस लेख मे किसी भी ज्योतिष तकनीक एवं नियम का उल्लेख नहीं करूंगा बल्कि जन्मकुंडली विवेचना कितनी सार्थक हो सकती है इस बात को केंद्र मे रखकर ही बात की जाएगी।

बात आगे करने से पहले यह भी बता देना चाहता हूँ कि कुछ जगह पर जन्म कुंडली नहीं होती, या जन्म से जुडी जानकारियां अधूरी या अशुद्ध होतीं हैं जैसे समय का सही पता न होना , दिनांक मे भ्रम होना इत्यादि। ऐसे लोगों के प्रश्न ज्योतिष से उत्तर देना संभव है और यह एक सटीक तरीका है।

 

शैक्षिक स्तर की विवेचना :-   

ucch shiksha higer education
ज्योतिष विद्या द्वारा जन्म कुंडली या प्रश्न कुंडली विवेचना से यह देखा जाता है कि  बच्चे मे विद्या का योग है कि नहीं। यह कोई आवश्यक नहीं है कि  यदि परिवार मे सब उच्च शिक्षित हैं तो बच्चा भी उच्च शिक्षित होगा या यदि सब अल्प शिक्षित हैं तो संतान भी कम पढ़ी लिखी होगी। विद्या का योग देखते समय जन्म कुंडली मे मानसिक ध्यान जिसका स्मरण शक्ति से सीधा सम्बन्ध है , समझने की शक्ति आदि कैसी है। जन्म कुंडली मे चंद्र, बुध, गुरु आदि की स्थिति बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।  यह भी आवश्यक है कि प्रथम भाव का स्वामी (लग्नेश) की स्थिति भी सुढ़ृड़ होनी चाहिए अन्यथा जन्मकुंडली के अच्छे योग भी सही ढंग से परिणाम नहीं दे पाते। तीसरे एवं पंचम भाव से बच्चे के मानसिक झुकाव एवं सोचने समझने की शक्ति का आंकलन किया जाता है।

शिक्षा मे चौथे भाव का बहुत महत्व है। इस भाव से जीवन सुख, माता , चल अचल संपत्ति, वाहन आदि का विचार करा जाता है और, शिक्षा का विचार भी इस भाव से होता है। यह भाव यह दर्शाता है कि क्या बच्चा शिक्षित होगा या नहीं , यानि विद्यालय जायेगा या नहीं। इस भाव का सम्बन्ध नवम भाव (उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान) से हो तो उच्च शिक्षा का योग बनता है। ग्यारवें भाव  से सम्बन्ध उच्च शिक्षा के  प्रबल योग बनाते हैं। तीसरा भाव , चौथा भाव , नवम भाव , ग्यारवा भाव एवं बारहवा भाव सम्बंधित हों तो विदेश शिक्षा के योग बनते हैं।

उपरोक्त विवेचना मे जो दूसरा महत्वपूर्ण भूमिका हैं वह महादशा और अन्तर्दशा की है।  छात्र जीवन मे महादशा और अन्तर्दशा यदि उपरोक्त भावों एवं / या  ग्रहों की हों तो बच्चा शिक्षा मे अच्छा प्रदर्शन करता है। यदि उपरोक्त भावों एवं ग्रहों का सम्बन्ध दसवे भाव (रोजगार एवं वयवसाय ) से हो तो बच्चा पढ़ने के बाद अपनी  उच्च शिक्षा से सम्बंधित क्षेत्र मे ही रोजगार या व्यापार करता है।

एक ज्योतिषी को बच्चे के स्वास्थ एवं आयु की मौन रूप से विवेचना कर लेनी चाहिए और बालारिष्ट योग और दूसरे अरिष्ट योगों का आकलन कर के ही फल कहना चाहिए।


शैक्षिक विषयों का चुनाव :-

शैछिक विवेचना से बड़ी कक्षा मे विषय के चुनाव मे भी बड़ी मदद मिल सकती हैं। पूर्ण विवेचना मे बच्चे के मानसिक बल , शिक्षा योग, मानसिक झुकाव एवं आने वाले समय मे दशा इत्यादि की विवेचन के आधार पर भ्रम की स्थिति काफी कम की जा सकती हैं।

छात्रों की दूसरी समस्यां :-

पढाई के साथ साथ आज छात्र कई और भी चीज़ों के संपर्क मे आने से ज्यादा जानकारी रखते हैं और कई तरह की गलत संगत और व्यसनों के भी शिकार हो जाते हैं।
कभी कभी छात्र का पढाई मे रुझान नहीं होता परन्तु और कई तरह की प्रतिभा उसमे होतीं हैं।

उपरोक्त सभी तरह की स्थितियों मे ज्योतिषीय विवेचना  मार्गदर्शन का काम कर सकती हैं। और समय रहते सही कदम उठा कर बच्चे को सही राह पर डाला जा सकता हैं।

नए अवसर :-

ज्योतिषी को भी नए नए क्षेत्रों और विषयों के बारे मे पढ़ते रहना चाहिए और ज्योतिष मे अनुसन्धान करते रहना चाहिए। आज बहुत सारे नए विषय और क्षेत्र हैं जिनका ज्योतिष ग्रंथों मे कोई उल्लेख नहीं है अतः यह अनुसन्धान का विषय है कि यह नए विषय ज्योतिष विवेचना के द्वारा माता-पिता को बताये जाएं  और सही मार्गदर्शन किया जाए।

बच्चों मे तनाव :-

आजकल बच्चे भी डिप्रेशन और तनाव के शिकार हैं। बच्चों की आत्महत्या के  कई  सारे समाचार सुनने को मिलते हैं। बच्चों का क्रोधी होना व , या गुमसुम रहना आदि सब मानसिक तनाव के लक्षण  हैं।

ज्योतिष इस क्षेत्र मे अग्रिम रूप से विवेचना कर के माता-पिता को सचेत कर सकती है।

ज्योतिष उपाय:-

जैसा की ज्योतिष उपाय के लेख मे मैं यह उल्लेख कर चुका हूँ कि  ज्योतिष कार्मिक गति नहीं बदल सकती परन्तु ज्योतिषीय उपाय कई तरह के  अनिष्ट से हमारी रक्षा करते हैं और अरिष्ट के प्रभाव को कम करते हैं।
यदि ज्योतिषी किसी प्रकार के उपाय के सुझाव दें तो यथा संभव बच्चे से करवाना चाहिए और अरिष्ट के प्रभाव को कम और शुभ प्रभाव को बढ़ाना चाहिए।

और अंत मे :-

जन्म कुंडली की सही विवेचना के आधार पर ही माता-पिता को अपने बच्चे से शैछिक अपेक्षा रखनी चाहिए। कभी भी मछली को दीवार पर चढ़ने की क्षमता नहीं आंके | दोनों की अपनी छमता हैं। हर बच्चा अनोखा है। उसे उसकी क्षमताओं के लिए सराहें और आगे अवसरों का लाभ उठाने लायक बनने मे सहायता करें। यही माता-पिता की सही भूमिका है।  सिर्फ अंकतालिका मे अच्छे अंक लाने की होड़ मे बच्चों के जीवन को दांव कर मत लगाएं।

सप्रेम |

यह भी पढ़ें :  शिशु जन्म के समय का मुहूर्त निकालना 

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Astrology and higher education

 इस लेख को हिंदी में पढ़िए

How to take help of Astrology in higher education guidance ?


Everyone wants to be successful and education plays an important role in this achievement.

In this competitive times when we have numerous options and means available, getting confused while choosing the best among all is natural.

Every student wants to get the higher education but the biggest challenge is now to rank higher in the merit list which could facilitate in getting better job or doing other work for living.

I have observed during my interaction with the people, when they solicit advise of astrology about their children, then the first question is often about the education and career. The health, which is the most important aspect of the child at that stage is seldom inquired about unless the astrologer categorically points about it. This proves that for we Indians, the education and career tops the list of our priorities.  

In this article, I will throw light on the role of astrology in knowing the level of education of a child.

Astrology not only decodes the level of education one may attain but also the level of intelligence one has, can also be known. Here, intelligence refers to the ability to grasp and understand. I am not covering astrological principles and various techniques deciphering deeper on this subject. How astrology can help to understand a general trend of the educational aspect of the child, is the objective of this article.

Let me remind you that in some cases the birth data like time, date etc are doubtful or not known. In such cases the analysis is done through the question astrology.

Higher education


Analysis of the level of education:


The first thin analyzed through the birth chart or the question chart is the prospects of education for a child. Does child has the formal education or not? It is not necessary that if a child is born in a family of highly educated people then he or she will also reach to that level and vice versa. The birth chart is analyzed further to know the level of intelligence and concentration. Concentration has direct relation with the memory. In a birth chart, moon, mercury, jupiter are the planets which should be strong through placements and conjunction. It is imperative to have a strong first house lord and house so facilitate all the auspicious yoga manifesting in the life of the child. Third and fifth house indicate the mental inclination and intelligence of the child. Interest in various activities and subjects can be known through the thorough analysis of these factors.

In the educational prospects, role of the fourth house is most important. It indicates the formal education of the child along with other important aspects like domestic happiness, mother, assets, vehicles etc. It also indicates the subjects suitable for higher studies. The connection of fourth house with ninth and eleventh forms the good yoga for the higher education which may include research work etc.

After the above analysis, the role of the planetary periods play a vital role in manifesting the results of various combinations indicating education.

It is imperative for an astrologer to analyze the longevity, and other inauspicious combinations in the horoscope before he puts forward his readings.

Selection of subjects in higher classes:

Astrology gives excellent guidance in the selection of stream of subjects in higher classes by observing the mental inclination and aptitude, and connecting it with vocational prospects based on the various combinations and upcoming planetary period.

Challenges of students

Today students are in stress. This stress level is due to the fear for career thus pressure for scoring high in the exams. All this are leading to the suicidal tendencies and other mental disorders like childhood depression, anxiety and personality and behavioural disorders. Students are also under the influence of electronic media and sometimes group with the wrong people who could ruin their entire life.

Astrology can help in guiding both child and the parents in advance about these indications and how to be attentive towards these pitfalls.

New opportunities:

This is the dynamic age of technology. Everyday new things are coming, new avenues are opening in existing fields. Even many branches have started getting prospects of vocation with the advent of newer technologies.
An astrologer must keep himself abreast with the latest trends in various fields. It will make his guidance more relevant for the child and parents.
Even astrologers must have good understanding of the human psychology in general and must practice good communication skills.

Astrological remedies:

In my article, I have given details about various aspects of astrological remedies. If  your astrologer is suggesting astrological remedies, then help your child to perform them regularly in best possible manner. Astrological remedies mellow down the inauspicious impacts and enhance the auspicious aspects of planetary influence.

Concluding words:

A correct analysis of the horoscope can guide the parents about the potential of their child. Never try to teach a fish to climb a wall. Every child is unique. Help your child in making maximum out of the life by capitalizing on the various talents and areas of strength. This is the true role of the parents for the child. Do not put your child in the rat race of scores in marks sheet. 

Good wishes. 

Also read : How does astrology help in stock market success?

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शुक्रवार, सितंबर 18, 2020

Aversion from English language ( Serenity Surrender Case study)

 इस लेख को हिंदी मे पढ़ें
 

How does Serenity Surrender Healing helped to remove the fear of English Language?

(Name, place, and time have been changed to maintain the personal secrecy of the person)

Namita was the student of class IV. English language was her biggest challenge. She was weak in all the aspects of the language. She was against this language and never wanted to study it. Various ways were applied to solve the issue but all in vein. Her parents were worried.

Namita was brought for the Serenity Surrender (SS) session. 

jyotish healer healing
Serenity Surrender Healing

 

In the session, a past life of Namita was revealed. Let us understand, that in the SS session the subject is not hypnotized and made unconscious. Healer connects with the subject energetically and all the information related to issue are revealed to the healer only. Healer then heals the belief system related to the issue, which is revealed to him.

Namita was a child in a family in Jerusalem. Her name in that life did not reveal in the session. She was a loving child. Her family was a devotee to the local church. Namita always loved to play with the other children.

In the local church some translation work related to holy Bible  was to be done. A group of children was selected who had beautiful handwriting. Namita was in that group.  The timing of that work clashed with the time to play for Namita. It was a conflict. She did not want to join the group but, this was the honour for the family to have their child in that group of selected children.

Namita had two challenges. First, her time of playing in the evening was taken away by the church. Second, the English language was new to her thus a challenge.

Namita thought to get out of that work. She thought about a way out. She deliberately started doing the mistakes in her writing work. For few days, she was counseled. She increased the mistakes. She was scolded also. But Namita was firm with her thought to come out of that group and reclaim her playing time of evening. Finally, she was asked to leave the work. She was very happy.

This entire episode created a deep impact on Namita in that life. Even the impressions are carried to this life too.
She had two beliefs deep in her sub-conscious:

1.English language robs her freedom. She must try to escape from it.
2.The best way to escape is; show inability for this language in all the aspects.

The belief system is so deeply settled in the soul energy that it starts manifesting and does not have any connection with the current reality.In this life, Namita has beautiful handwriting. Her deeply formed beliefs were making her averse from the English language though those situations when they were formed no more exist. Namita was healed for those beliefs.
 
No further sessions were done for Namita. In a year time, Namita improved with her English language in all the departments. Today, Namita can converse in English. She loves English songs and can sing them well.

Serenity Surrender helps to get to the root of the issue and resolves it. The result may be as expected or different but, whatever it is, it gives peace.

Share this article to help reach to the people and let them know the benefits of Serenity Surrender Healing.


With love,
Anurodh

 Click here for healing session 

 

Picture courtesy : Google images copyright free

अंग्रेजी भाषा से घृणा ( सेरेनिटी सरेंडर केस स्टडी )

कैसे सेरेनिटी सरेंडर हीलिंग ने अंग्रेजी भाषा का डर ख़त्म किया ? (लेख को अंग्रेजी मे पढ़ें )

(नाम, स्थान एवं समय व्यक्तिगत गोपनीयता के लिए बदल दिए गए हैं)

नमिता कक्षा ४ की छात्रा थी। उसकी सबसे बड़ी समस्या थी कि वह अंग्रेजी भाषा बोलने और लिखने मे कमजोर थी। बात करने पर वह कहती थी कि  उसको इस भाषा से घृणा है। यह भाषा स्कूल मे पढाई क्यों जाती हैं।  कई तरह की तरकीबें कर के देखी जा चुकी थी परन्तु कोई परिणाम नहीं निकला। नमिता के माता पिता बहुत चिंतित थे क्योंकि यह उसकी पढाई मे बाधा थी।

नमिता का एक सेरेनिटी सरेंडर (serenity surrender) हीलिंग सेशन किया गया।

jyotish healer healing
Jyotish Healer



सेशन के दौरान उसका  एक पिछला जन्म दिखाई दिया।  बताते चले कि सेरेनिटी सरेंडर हीलिंग मे हीलिंग करने वाले व्यक्ति को ना ही  सम्मोहित और ना ही बेहोश किया जाता है। हीलिंग करने वाले हीलर वयक्ति को ही सभी तरह की जानकारी प्राप्त होती हैं और वह उन जानकारियों के आधार पर उस व्यक्ति के अंदर बैठे विश्वास, विचार आदि को हील कर देता है।

नमिता का वह जन्म येरुशलम मे था।  वहां पर वह एक परिवार मे जन्मी थी जो बहुत धार्मिक था।  चर्च के प्रति उनकी अटूट आस्था थी।  नमिता एक प्यारी बच्ची थी और उसका खेलने मे बहुत मन लगता था।  उन दिनों उसके नगर के चर्च मे बाइबिल से सम्बंधित कुछ अनुवाद आदि का काम हो रहा था।  जैसा की दिखाई दिया कि उस धार्मिक काम के लिए  चर्च ने कुछ बच्चों को चुना था जिनकी लिखावट सूंदर थी।  नमिता उसमे से एक थी। (उस जन्म मे उसका नाम क्या था यह नहीं आया) | नमिता के लिए अंग्रेजी भाषा नई थी और वह चर्च का काम उस समय होता था जो उसका खेलने का होता था।  परिवार धर्म के प्रति इतना निष्ठावान था कि  नमिता का उस काम मे चुना  जाना उन लोगों के लिए सौभाग्य एवं सामाजिक प्रतिष्ठा की बात थी। परन्तु नमिता के लिए यह किसी सज़ा से कम न था।

नमिता हर दिन चर्च मे शाम को जाती और लिखने का काम करती। एक तो खेलने का समय न मिलना और दूसरा अंग्रेजी भाषा का ज्यादा ज्ञान न होना उसको बहुत ही परेशान कर रहा था। उसने इस काम से निकलने कि एक तरकीब निकाली।  वह जानकर लिखने मे गलतियां करने लगी।  कुछ दिन तो वहां पर उसको ठीक करने को कहा गया।  समझाया गया , थोड़ा डांटा भी गया परन्तु नमिता को यह बात समझ आ चुकी थी कि  गलती करना यहाँ स्वीकार नहीं है।  उसने और गलतियां करनी शुरू कर दी।  कुछ ही दिनों मे चर्च ने उसको उस काम से निकल दिया।  नमिता खुश थी।

इस पूरी घटना का उस समय की नमिता की आत्मा पर गहरा असर हुआ।  

१. उसको अंग्रेजी भाषा से घृणा हो गयी।  उसे लगने लगा की अंग्रेजी भाषा उसकी खेलने की और दूसरी स्वतंत्रता छीन लेती है।
२ इससे बचने के लिए उसको हमेशा भाषा लिखते समय गलतियां करनी हैं और बोलने से भी बचना है।

इस जीवन मे भी नमिता को खेलना बहुत अच्छा लगता था।  लिखावट बहुत सुंदर थी। और अगंरेजी लिखने मे बहुत गलतिया करती थी।  पढ़ने और बोलने मे परेशानी थी।

नमिता की यह वैचारिक समस्या  हील कर दी गयी।  
यहाँ यह जानकारी आवश्यक है कि  हीलिंग का परिणाम क्या होगा , कितना होगा, कब तक होगा ,यह समय के साथ ही पता चलता है।

उसका फिर कोई भी सेशन नहीं हुआ।  करीब एक साल के भीतर धीरे धीरे नमिता के  अंग्रेजी बोलने, पढ़ने  और लिखने के कौशल मे बहुत सुधार हुआ।  आज नमिता अंग्रेजी मे बात करती हैं, लिखती हैं और पढ़ती हैं।  और एक विशेष बात ; वह अंग्रेजी गानो की शौक़ीन हैं और उन गानो को गा भी लेती हैं।


सेरेनिटी सरेंडर हीलिंग
समस्या की जड़ को समझ कर उसका दिव्या निराकरण करता हैं।  यह परिणाम हमेशा वह नहीं होते जो आप चाहते हो परन्तु जो भी परिणाम आते हैं मन को शांति प्रदान करते हैं।

सप्रेम
अनुरोध  

हीलिंग के लिए यहाँ क्लिक कीजिये |

मंगलवार, अगस्त 25, 2020

ज्योतिष उपाय की सार्थकता

 Read this article in English

 

 मित्रों जब  आप किसी ज्योतिषी से परामर्श करते हो तो वह आपको कई तरह के उपाय बताते हैं , जिनमे रत्न , पूजा, दान , उपवास आदि क्रिया हो सकती हैं। कुछ लोग इस बात पर आशंकित होते हैं कि यदि यह निश्चित है कि  जो होना है वह होना ही है तो उपाय किस तरह से सहायता करेंगें  या कभी कभी यह भ्रान्ति भी होती है कि  उपाय करने से सब ठीक हो जायेगा और विपत्ति या विपरीत समय से छुटकारा मिल जायेगा।

इस लेख मे मैं अपने अनुभव के आधार पर कुछ सच्चाई लिख रहा हूँ।  इस लेख का आशय किसी भी ज्योतिष विद्वान के इस विषय मे अनुभव को चुनौती देना या गलत साबित करना नहीं है।  इस लेख का विषय आम व्यक्ति को ज्योतिष उपाय के विषय मे जागरूक करना है। 


इस लेख में मैं जिज्ञासु जन के द्वारा पूछे गए प्रश्नो को लेकर उनके उत्तर लिख रहा हूँ।

1 क्या ज्योतिष उपाय से जीवन बदल जायेगा ?

जन्मपत्री के विश्लेषण के पश्च्यात ही यह बताया जा सकता है आपके जीवन की  क्या दिशा है। ग्रह स्थिति , महादशा अंतर दशा , गोचर आदि की विवेचना के बाद ही यह सुनिश्चित होगा कि ज्योतिष उपाय कौन से करने श्रेयस्कर होंगे।
विवेचना के बाद ही यह बताया जा सकता है कि ज्योतिष उपाय से कितना लाभ संभव है।

2 अगर सब कुछ निश्चित है तो ज्योतिष उपाय का क्या लाभ ?

अगर बरसात हो रही है या तेज़ धूप  है तो छतरी का क्या लाभ ? लाभ है क्योंकि छतरी बरसात या धूप के प्रभाव को कम  करती है।
उसी प्रकार ज्योतिष उपाय भी विपरीत समय के प्रभाव को कम कर देते हैं यदि वह बताई गई विधि, लगन , श्रद्धा से लगातार किये जाए। ज्योतिष उपाय जादू नहीं करते परन्तु अपना शुभ प्रभाव अवश्य दिखाते हैं।

ज्यादातर लोग ज्योतिष परामर्श समस्या मे फसने के बाद लेते हैं और आशा करते हैं कि समस्या से छुटकारा मिल जाये।

प्रथम तो यह समझ ले कि विपरीत समय जबतक है तब तक रहेगा , कोई भी पूजा , अनुष्ठान , रत्न उस समय को काम या ज्यादा नहीं कर सकता क्योंकि इसका कार्मिक आधार है।  यदि ज्योतिष परामर्श नियमित लिया जाये तो यह उपाय एक ढाल कि तरह काम करते हैं। वैसे ही की पानी बरसने से पहले ही छतरी खोल लेना न कि पानी मे भीग जाने के बाद।  दोनों ही स्थिति मे छतरी अपना काम करेगी परन्तु आप  पर  प्रभाव अलग होगा।

ज्योतिष प्रभाव शुभ समय के अनुभव को बढ़ा देते हैं। शुभ समय भी निश्चित है और यह भी आएगा ही।  ज्योतिष उपाय निश्चित तौर पर शुभ अनुभव को बढ़ाते हैं।

3 ज्योतिष उपाय के विषय मे आप क्या राय देना चाहेंगे ?

मेरी राय मे ज्योतिष उपाय लगातार करना चाहिए यानि परामर्श के अनुसार यह उपाय प्रतिदिन करने से शुभ अशुभ प्रभाव पूरी तरह से अनुकूल रहते हैं।

4 मुझे एक ज्योतिषी ने अनुष्ठान बताये हैं , परन्तु वह बहुत ही मंहगे हैं। क्या मुझको करना चाहिए ?

यह आप पर निर्भर करता है कि आपका विश्वास कैसा है। कोई भी ज्योतिषी अपने अनुभव के बल पर ही ज्योतिष उपाय बताता है। अनुष्ठान आदि के खर्चे पर भी आपको ही निर्णय लेना होगा। परन्तु इस बात से आश्वस्त हो जाये कि जो भी उस अनुष्ठान या पूजा करा रहा है वह उसके विधि विधान का विशेषज्ञ हो।

5 आप किस प्रकार के ज्योतिष उपाय बताते हैं ?

ज्योतिष उपाय का पहला नियम है कि जो व्यक्ति परामर्श ले रहा है उसको सही स्थिति से अवगत करा देना आवश्यक है। स्थिति का सही ज्ञान देते समय यह भी आवश्यक है कि  व्यक्ति को संभावनाएं बताया जाए, उसको न ही  डराया जाये और न ही अत्यधिक आशावान बनाया जाए।
 
मैं बहुत ही सरल विधियां बताता हूँ जिनमे ज्यादातर चिड़ियों एवं जानवरों  को कुछ विशेष खाने की वस्तुएं देना, इष्टदेव की प्रतिदिन पूजा, चालीसा, स्त्रोत , आदि का पाठ हो सकता है जो की कोई भी व्यक्ति आराम से दैनिक दिनचर्या मे सम्मलित कर सकता है।

मैं ज्योतिष उपाय को प्रतिदिन करने पर जोर देता हूँ। यह स्थितियां अनुकूल रखते हैं। मन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

6 क्या रत्न पहने से लाभ मिलेगा ? वह बेहतर होते हैं ?

रत्न भी प्रभावशाली उपाय हैं परन्तु मैं रत्न सिर्फ शुभ ग्रह को शक्ति प्रदान करने के लिए ही पहने की सलाह देता हूँ। रत्न को शुभ महूर्त मे पहने से उसका प्रभाव बढ़ जाता है परन्तु यह भी निश्चित कर ले कि रत्न की गुणवत्ता अच्छी हो और आपके बजट मे हो।

7 यदि परिवार जन के लिए मैं उपाय करूँ तो क्या उसको लाभ होगा ?

यदि बीमार की जगह आप दवा लें तो क्या बीमार व्यक्ति को लाभ होगा ? नहीं होगा।  यही बात ज्योतिष उपाय पर भी लागू होती हैं।

छोटे बच्चे , अत्यधिक बीमार व्यक्ति जो चिकित्सालय मे भर्ती है, परिवार का सदस्य जो कुछ समय के लिए नगर से बाहर गया हो आदि परिस्थिति मे आप उपाय उनके नाम से कीजिये |

छोटे बच्चे के हाथ से वस्तु स्पर्श करा कर पशु पछियों को दें।  बीमार व्यक्ति यदि घर पर हैं तो भी हाथ से स्पर्श करा दीजिये।  यदि व्यक्ति जल्दी मे हैं और खुद नहीं कर सकते तो स्पर्श करके आप को दे दें और बाद मे आप उसको पशु पछियों को दे दीजिये।  प्रातः उपाय करने से लाभ होता है।

8 हीलिंग से क्या लाभ होता हैं ?

सेरेनिटी सरेंडर हीलिंग से हमारी कार्मिक यात्रा मे अर्जित कर्मों के प्रभाव को जाना जाता है और प्रभावशाली तरीके से उसको हील किया जाता है। हमारे आत्मिक विश्वास हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं और यदि उन विश्वास को समझ कर उनको सही विश्वास एवं विचार से बदल दिया जाये तो जीवन की बहुत सारी समस्या का हल निकला जा सकता हैं।

(सेरेनिटी सरेंडर  के लिए यहाँ क्लिक कीजिये)

अंत मे मै  यह कहना चाहूंगा कि आत्मविश्वास होना अच्छा है परन्तु ज्योतिष परामर्श आपका सही मार्गदर्शन करता  है।

जन्म कुंडली की विवेचना से यह भी बताया जा सकता है कि जिसको उपाय बताया जा रहा है वह उसको श्रद्धा पूर्वक करेगा या नहीं। और उपाय करने से कितना लाभ होगा।

इष्टदेव का ध्यान  , गुरु एवं  परिवार मे बुजुर्गों का आशीर्वाद और, अपना कर्म सही नियत से करना बहुत बड़ा उपाय है, और यदि आप कोई आध्यात्मिक साधना करते हैं तो उस साधना को और कीजिये। आध्यात्मिक साधना सभी तरह की परिस्थितियों को अनुकूल बनाती है और मनः स्थिति सकारात्मक रखती हैं और मनः स्थिति ही जीवन के परिणामों को प्रभावित करती हैं।  ज्योतिष उपाय मनः स्थिति को प्रभावित करते हैं।

शुभकामनाएँ,

अनुरोध

ज्योतिष हीलर की सेवाओं के विषय मे जानने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

How do astrological remedies help?

 इस लेख को हिंदी मे पढ़ें

 

Friends, if you consult an astrologer, then he tells you many remedies, in which gems, worship, donations, fasting etc. can be done. Some people are apprehensive that, if it is certain that what is to happen is going to happen,then  how will the remedies help or, sometimes there is confusion that taking measures will fix everything and will get the rid of the adversity.


In this article, I am writing some truth based on my experience. This article is not intended to challenge or prove any astrological scholar's experience in this subject. The objective of this article is to make the common person aware of the topic of astrological remedies.


In this article, I am writing answers to the questions asked by my clients.

1 Will astrological remedy change life?

Only after analyzing the horoscope, it can be told about the your life’s trends. Only after studying the planetary positions, mahadasha, antar-dasa, transit etc., it will be ascertained that which astrological measures will be best to take.
Only after deliberation can it be told how much benefit is possible from astrological remedy.


2 If everything is certain then what is the benefit of astrological remedy?

If it is raining or there is strong sunlight, what is the benefit of an umbrella? There is a benefit because an umbrella works to lower down the influence of rain or sunlight.
Similarly, astrological remedies also reduce the effect of the adverse phase  if it is done continuously by following the suggested method,with dedication and devotion. Astrological remedies do not do magic, but do show their auspicious effects in due course.

 Most people take astrological counseling after getting into the problem and hope to get rid of the problem.
First of all, understand that the adverse time will be there if it is indicated in your horoscope and, no worship, rituals, gems can work to reduce the duration of that time because it has a karmic base. If astrology consultation is taken regularly then these remedies work like a shield. In the same way, open the umbrella before it rains and not after getting soaked in water. In both the situations the umbrella will do its job but effect on you will be different.

Astrological effects enhance the experience of auspicious times. Auspicious time is also fixed and this too will come. Astrological remedies definitely enhance auspicious experience.

3 What opinion would you like to give regarding the astrological remedy?

In my opinion astrological remedy should be done continuously, that is, according to the advice, by doing this remedy daily, the auspicious inauspicious effects are optimized to a great extent.


4 An astrologer has told me the rituals, but they are very expensive. Should i do?

It depends on your faith. Any astrologer gives astrology solution only on the basis of his experience. You also have to decide on the expenses of rituals etc. But be assured that whoever is performing that ritual or worship should be an expert.

5 What types of astrological remedies do you suggest?

The first rule of astrological remedy is that, it is necessary to make the person aware of the situation. While giving accurate knowledge of the situation, it is also necessary that the person be told about the possibilities, that he should neither be intimidated nor made euphoric.

I tell simple methods in which some special food items are given to the birds and animals, there can be daily worship of the ishtadeva, chalisa, strota, etc. which any person can comfortably incorporate into the daily routine. I see the comfort level of the person in doing the suggested remedies

I insist on doing astrological remedy daily. The conditions are optimized this way and have a positive impact on the mind too.


6 Will wearing gems benefit? Are they better?

Gems are also effective remedies, but I recommend wearing gems only to provide strength to the auspicious planet(s). Wearing a gemstone in auspicious time increases its effectiveness, but also ensure that the quality of the gemstone is good and in your budget.


7 If I do the remedies for the family, will it benefit them?

If you take medicine instead of sick, will the sick person benefit? The answer is NO. The same thing applies to astrological remedies as well.

In case of very young children, highly ill persons who are admitted in the hospital, family member who have gone out of the city for some time, you should do remedies in their name.

8 What are the benefits of healing?

Serenity surrender healing modal helps us to understand our karmic makeup and the reasons for the various issues of the life. In this healing modal the belief system which actually manifests our physical reality is healed and thus our thought process, attitude are transformed and thus our life issues too head towards the solutions in the highest best of all.

(To know more about Serenity Surrender, kindly click here)

In conclusion, I would like to say that it is good to have self confidence but astrological counseling gives you the right guidance which compliments your self confidence.

It can also be told from the horoscope that the person who is being told the remedy will do it or not. And how much benefit will come from doing those remedies.

The blessing of the elders, guru, family wishes and, doing your deeds with proper intention are the great solutions and, if you do any spiritual practice then do that to make it more stronger. Spiritual practice adapts to all kinds of circumstances and keeps the thoughts positive and it affects the results in life. Astrological remedies  facilitates a positive mindset.

With good wishes,

Anurodh

To know more about the Jyotish healer services, please click here

 

शनिवार, अगस्त 15, 2020

Serenity Surrender healing

 (READ THIS ARTICLE IN HINDI)

 We the souls in the human experience. We are not the body having soul. Soul is on an unending  journey since the time immemorial. There is only one purpose and that is , to recognize itself as unconditional love which is the ultimate truth of all. 



Human has been given a power. That power is Intelligence through which he lives the life as per the norms of the time and place. Intelligence is independent and it could be conditioned as per the wish of the human being.

The second power is Mind. Mind is one entity which experiences all the fruits of karma done by applying intelligence through the five senses. This experience becomes the experience of soul. It becomes a belief.

This implies that all the experience made by us are mental and that forms the beliefs in our mind that are carried life after life. This is the impact of this phenomenon that certain subjects or piece of knowledge is understood easily even though a formal education or training is not given to the child.

Few mor examples are also there. Like, sometimes we feel that we have visited a place before though it is our first visit to there. Sometimes we feel a strong connection with a person or aversion for no reason. Fear about something or a situation like, fire, water, closed spaces, crowded places, specific animal etc.  Sometimes we learn certain skill very fast.
All these are the results of experiences of  the past lives lived by us as a soul.

Today’s challenges have the roots deep in our mind. As intelligence can not access to these layers that is why people are amazed by the certain patterns of their life and feel clueless about the causes of the same.
As a soul we decide what to experience in an incarnation and accordingly the situations are presented to us so that we can learn the unlearned lessons.

For example, in an incarnation soul wants to learn the lesson to be self confident as it failed to experience the same in the previous births, then in the current life, various situations will be presented where he will feel challenged and in many instances he may back out from the situation but, ultimately he may feel confident and gradually learn the decided lesson.

Many a times relationships are strained. Every relationship is there to help to recognize ourselves as love through it. Good relationships are also the culmination of past lives. Same way; the  personality types, the situations presented in profession, health conditions, all have roots in the past lives.

If everything is the culmination of the past life and what can be done now?


 Lot can be done.

Serenity Surrender Healing

Serenity Surrender is an effective healing modal through which we can know the deep spiritual causes of various life patterns in various aspects of our life. It not only helps to know the reasons of the issues but does heal the emotions and beliefs associated with the issue.

This healing modal is safe and effective for the people of all age groups and gender.

In the session, the person who wants the healing therapy tells the concern to the healer. The healer connects with the person energetically and probes his mind for the reasons of the issues. The beliefs and emotions associated with the issue are healed and explained to the person.
During the session, the person who is healed does not feel anything. The effects of healing are felt in few days or weeks. For few issues, more than one session may be required.

Serenity Surrender is channeled to Mrs. Shivi Dua and came to public in 2010. (www.serenitysurrender.com)

Please be informed that Serenity Surrender is not hypnotism, past life regression and predictive method like astrology.

For more information please contact.

For healing session please click here

with good wishes,

Anurodh

सेरेनिटी सरेंडर - हीलिंग

(इस लेख को अंग्रेजी मे पढ़िए)


हम मानव शरीर मे आत्मा हैं ना कि हम मानव शरीर हैं जिसमे एक आत्मा है। आत्मा अनंत काल से एक अनंत यात्रा पर है और उस यात्रा मे अब तक कई जन्म ले चुकी है। आत्मा की इस अनंत यात्रा का सिर्फ एक ही लक्ष्य है , और वह लक्ष्य है अपने प्रेम स्वरुप की पहचान करना।

मानव को एक शक्ति प्रदान की गयी है और वह है उसकी 'बुद्धि' | बुद्धि के द्वारा ही मानव को काल एवं स्थान के अनुसार जीवन जीना आ जाता है। मानव बुद्धि स्वतंत्र है। यानि मानव अपनी बुद्धि को जैसा चाहे बना सकता है।
मानव को दूसरी शक्ति 'मन' के रूप मे मिली है जो इन्द्रियों के द्वारा बुद्धि द्वारा किये गए कर्म को अनुभव करती है।  यह अनुभव आत्मा का अनुभव है।


अतः समस्त कर्म के अनुभव मानसिक हैं।  यह अनुभव हमारे मन मे स्थाई हो जाते हैं।  मन और आत्मा मानव के प्रत्येक  कर्म को निर्देशित करते हैं। बुद्धि प्रत्येक जन्म मे नई होती है क्योकि यह काल और स्थान को विवेचित कर के निर्णय लेने में सहायता करती है।  परन्तु आत्मा का मानसिक अनुभव स्थाई हो जाता है।
यह आत्मा का मानसिक अनुभव ही का कमाल है कि , हमको कई बार  विषय बड़ी जल्दी समझ आता है या , कई बार जन्म से ही कोई बालक किसी विशेष योग्यता को प्रदर्शित करता है जबकि उसको उस विषय का पर्याप्त ज्ञान भी नहीं दिया जाता।      

कुछ और उदाहरण देखने मे आते हैं।  जैसे; कभी कभी किसी जगह पर  पहली बार जा कर लगता है जैसे कि हम उस जगह को जानते हैं। किसी व्यक्ति विशेष के लिक बहुत लगाव होना। या किसी विशेष व्यक्ति से बिना किसी कारण के घृणा होना। किसी भी चीज़ या स्थिति से अकारण  डर लगना जैसे , आग, पानी, बंद जगह, भीड़, कोई विशेष जानवर आदि। कभी कभी किसी विशेष तरह के काम मे बढ़ी जल्दी महारथ हासिल कर लेना।
यह सब आत्मा द्वारा अर्जित मानसिक अनुभव जो कि पिछले जन्मों मे किये गए हैं उनका परिणाम हैं।

हमारी आज की जो भी समस्या हैं उनकी जड़ पिछले जन्मों मे है।  बुद्धि उस कड़ी को नहीं जोड़ सकती इसलिए लोग कहते हैं कि  उनको नहीं पता कि  जो उनके साथ हो रहा है वह क्यों हो रहा हैं। मानसिक अनुभव आत्मा की अनंत यात्रा का सत्य हैं और किसी भी जन्म मे यह आत्मिक निर्णय होता हैं कि आत्मा उस जन्म मे क्या सीखने आयी हैं।  अतः उस तरह कि  परिस्तिथि का चुनाव किया जाता हैं जहाँ वह अपने पाठ सीख सके।

उदाहरण के लिए , यदि किसी जन्म मे आत्मा यह निर्णय लेती हैं कि उसको आत्मविश्वास सीखना हैं क्यूंकि पिछले जन्मों मे प्रयास के बाद भी वह यह नहीं सीख पायी।

अतः इस जन्म मे उस वयक्ति के सामने बार बार ऐसी परिस्तिथियों के निर्माण होगा जो उसको  कम आत्मविश्वासी होने का प्रमाण देगी और अवसर भी देगी कि वह आत्मविश्वास जागृत करे। क्यूंकि वह वयक्ति पिछले जन्मों मे कई बार असफल हो चुका है अतः उसकी वह स्मृति जाग जाएगी और वह हो सकता है परिस्थिति से डर जाये परन्तु पूर्ण आशा है कि वह आत्मविश्वास से वह भर जाये और धीरे धीरे आगे बढ़ने लगे।

कई बार संबंधों मे भी समस्या आती हैं। हर सम्बन्ध कुछ सिखाने आता हैं। अच्छे सम्बन्ध भी पूर्व जन्म से आये हैं और तनाव ग्रस्त सम्बन्ध भी उसी की देन हैं। इसी प्रकार वयक्तित्व के विकार एवं गुण , रोजगार आदि मे प्रगति या बाधा, अच्छा स्वास्थ्य या बीमारी , सभी तरह के अच्छे बुरे अनुभव पूर्व जन्म कर्म की देन हैं।

यदि सब पिछले जन्म से ही आया है तो फिर किया क्या जा सकता हैं ?

बहुत कुछ किया जा सकता हैं।  जैसे ;

  सेरेनिटी सरेंडर हीलिंग

सेरेनिटी सरेंडर हीलिंग एक प्रभावशाली तरीका है जिसके द्वारा न सिर्फ हमको अपने जीवन मे हो रही  कई तरह की समस्या और घटनाओं का कारण पता चलता हैं बल्कि उनसे सम्बंधित मानसिक विचार एवं विश्वास को भी इस प्रणाली द्वारा सही किया जा सकता है।
यह हीलिंग प्रणाली अति सुरक्षित एवं प्रभावशाली है।  हर आयु वर्ग के स्त्री पुरुष इस हीलिंग प्रणाली से लाभान्वित हो सकते हैं।  

सेरेनिटी सरेंडर सेशन मे जो वयक्ति हीलिंग करवाता हैं वह हीलर को अपनी समस्या बताता है।  हीलर उस व्यक्ति से मानसिक रूप से अपने आप को जोड़ता है और बताई गई समस्या का कारण पता करता हैं और फिर हील कर देता है। हीलिंग करने वाले वयक्ति को प्रायः कुछ पता नहीं चलता। परन्तु हीलिंग के कुछ समय पश्चात फर्क अनुभव होता है। कई बार एक से ज्यादा भी सेशन करने की जरूरत पड़ सकती है।

यह हीलिंग प्रणाली श्रीमती शिवि दुआ को ज्ञात हुई और २०१० मे यह सार्वजानिक रूप से लोगों के लिए उपलब्ध हुई।
(www.serenitysurrender.com)


सेरेनिटी सरेंडर सम्मोहन एवं ज्योतिष विद्या नहीं है।



यदि आप और जानकारी चाहते हैं तो  यहाँ क्लिक कीजिये |

हीलिंग के लिए कृपया यहाँ क्लिक कीजिये |

सप्रेम,
अनुरोध


बुधवार, जुलाई 08, 2020

Indo - China : Is there a war?





Defense forces of India and China are face to face in Ladakh. The question in everyone's mind is, will there be war?

Many predictions were made on solar eclipse that the condition of war is very strong. I wished to know this question also in my mind.

On 24th June, 2020, through the question astrology, the horoscope of this question was seen and the answer came as follows:

The Indian position is quite strong, especially in the international arena. India is on the offensive but will not make any offensive action. Anyway, India has a national policy of not attacking first in war. The planets show the restrain on aggression in Indian attitude.
With this, China will also look aggressive but it will not be able to take any step towards India. China will try to tarnish the image of India but it will not succeed.


In the question chart, Ve mahadasa, Ra antardasa, Sa pratyantar is running. Sa is retrograde and will remain so till September 24, 2020.
Circumstances will remain same, but there will no full scale war. The situation is likely to return to normalcy after September.

No chance of  full scale war between Indian and China.


For those who know KP Astrology, a brief analysis is given here;



Following is the description of the question;

KP Number = 13
Date = 26 June 2020
Time = 20 hrs 39 min 50 sec
Day = friday
Location = Greater Noida West, Uttar Pradesh (77 deg 25 min E, 28 deg 25 min N)
Software = Jyotish Deepika

As it was a question for the country, the lagna was considered a India.

1. The lagna sublord is Ma which is in the constellation and sub of Sa. Saturn is retrograde. The signs of Ma is Pisces which is water element dual natur sign thus makes sensitive and arrests the aggression of Ma.

Ma
11'-1-8
Sa (r)
10 '' - 11-2-3-4'-9-8-12
Sa (r)
10 '' - 11-2-3-4'-9-8-12

8 - 12  show the strength of the opposition and losses to the first party ; India. But 11 - 1 -10 "- 2 make Ma a strong. So the position of India is strong but Sa (r) will not allow any aggressive (war related) action.

2. The seventh house represents the opposition. If 8 - 12 signify in the 7th sublord, then the opposition will be strong and may become the attacker. Here oppostion is China.
The 7th sublord is Ve. Ve is a beneficial planet but sits in its own sign Taurus. Taurus has earth element, so practical behavior is seen. This sign looks aggressive like bull and often does not take aggressive steps on its own.
Therefore, China will also show aggressive attitude and will intermittently scare and intimidate India.


Ve
1'-2-7'-5
Mo
5-4-2
Ma
11'-1-8

Here too, there are 5 -11 who signify friendship (here in war-related subjects, they greatly reduce the chance of attack). Ve, Mo are sitting on aggressive signs; Taurus and Leo and Ma is sublord then China’s attitude will be aggressive but it is very difficult to make up the mind to attack India

Venus is also a Mahadasha lord, so the possibility of war is minimum.
The antardasa belongs to Rahu.

Ra
 2-3 '' '- 7-6' '- 11' '- 12-5-10-1-8
Ma
11'-1-8
Su
3-5-6-10

Antardasha also signifies 2 -6 - 10 - 11 - 5, so Antardasha is also in favor of India and weakens the opposition (China) and inspires friendly behavior.

Sa is retrograde, therefore, Sa will not allow any aggressive step.

Therefore, there is no chance of full scale war.

The sublords of the third house and the ninth house are Sa, which is retrograde. Sa will not allow the faith to be established between both the nations/governments and Sa is a sublord of the third house and the ninth house thus shows false news, so in this case both the sides will try to confuse each other with many misleading information and propaganda.

After September 2020, Ve in Mahadasha and atardasa of Mercury will commence which will ease the situation and give India a more powerful position.

with love,
Anurodh

भारत - चीन : क्या युद्ध होगा ?

भारत और चीन की रक्षा सेना लद्दाख मे आमने सामने हैं। सभी के मन मे यह सवाल है कि क्या युद्ध होगा?

सूर्य ग्रहण पर  कई भविष्यवाणी की गयी कि  युद्ध के हालत काफी प्रबल है। इस प्रश्न को मेरे मन मे भी जानने की इच्छा हुई। 
चित्र : गूगल इमेजेज (कॉपीराइट फ्री )

२६ जून २०२० को प्रश्न ज्योतिष के माध्यम से इस प्रश्न की कुंडली बनाकर देखा गया और उत्तर इस प्रकार आया:-

 भारतीय स्थिति काफी मजबूत है खासकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर। भारत आक्रामक रुख मे है परन्तु कोई कदम नहीं उठाएगा। वैसे भी भारत की युद्ध मे पहल न करने की राष्ट्रीय नीति है।  ग्रह दर्शाते हैं कि भारतीय रुख मे आक्रामकता के साथ नियंत्रण बना रहेगा।

इसके साथ ही चीन भी आक्रामक दिखेगा परन्तु वह भारत की तरफ कोई कदम नहीं उठा पायेगा। चीन कोशिश करेगा कि वह भारत की छवि को ख़राब करे परन्तु वह सफल नहीं होगा।

 प्रश्न कुंडली मे शुक्र महादशा मे राहु की अन्तर्दशा और शनि का प्रत्यंतर है। शनि वक्री हैं और प्रत्यंतर २८ सितम्बर २०२० तक रहेगा।

तनातनी की स्थिति बनी रहेगी परन्तु पूर्ण युद्ध नहीं होगा।  सितम्बर के बाद स्थिति पूर्ण सामान्य हो जाने की सम्भावना है।

युद्ध होने की सम्भावना ना के बराबर है।

 जो लोग केपी एस्ट्रोलॉजी जानते हैं उनके लिए यहाँ संक्षेप मे विश्लेषण दिया जा रहा है ;


 प्रश्न का विवरण निम्नलिखित है ;

केपी नंबर = १३

दिनांक = २६ जून २०२०

समय = ८ बजकर ३९ मिनट ५० सेकंड

दिन =  शुक्रवार

स्थान = ग्रेटर नॉएडा वेस्ट, उत्तर प्रदेश (७७ deg २५ min पूर्व , २८ deg २५ min उत्तर

सॉफ्टवेयर = ज्योतिष दीपिका

 यह क्योंकि देश के लिए प्रश्न था तो लग्न को देश माना।

 १. लग्न सबलार्ड मंगल है जो शनि के नक्षत्र एवं सब मे है। शनि वक्री हैं। मंगल जल तत्व की राशि मीन पर हैं।

 o

11'-1-8

o (व)

10''-11-2-3-4'-9-8-12

o (व)

10''-11-2-3-4'-9-8-12

 8 - 12 विपक्षी का बल एवं अपना नुकसान दिखते हैं। परन्तु 11 - 1 -10 " - 2 मंगल को बलि बनाते हैं।  अतः भारत की स्थिति मजबूत हैं परन्तु वक्री शनि कोई भी  आक्रामक कदम (युद्ध सम्बन्धी ) नहीं उठाने देगा।

 २. सप्तम भाव विपक्षी जो दर्शाता हैं। यदि सप्तम सबलार्ड मे 8 - 12 प्रबल हो तो विपक्ष (चीन) बलि होगा और हमलावर हो सकता हैं।

सप्तम सबलार्ड शुक्र हैं। शुक्र सौम्य ग्रह हैं परन्तु अपनी राशि वृषभ मे विराजमान हैं। वृषभ पृथ्वी तत्व राशि हैं अतः व्यावहारिक आचरण दिखती हैं। यह राशि वृषभ (सांड ) की तरह ही आक्रामक दिखती है और प्रायः स्वयं आक्रामक कदम नहीं उठती है।

अतः चीन भी आक्रामक रुख दिखायेगा और बीच बीच मे हुंकार मारेगा और डरायेगा।

 शुo

1'-2-7'-5

o

5-4-2

o 

11'-1-8

 यहाँ भी 5 -11 हैं जो मित्रता के परिचायक हैं (यहाँ युद्ध सम्बन्धी विषय मे यह आक्रमण की सम्भावना को बहुत कम करते हैं) | शुक्र , चंद्र आक्रामक राशि वृषभ एवं सिंह पर विराजमान हैं और मंगल सबलार्ड है तो रुख आक्रामक होगा परन्तु आक्रमण का मन बनाना अत्यंत कठिन हैं।

 शुक्र महादशा स्वामी भी हैं अतः युद्ध की सम्भावना को बहुत काम करते हैं।

अन्तर्दशा राहु की हैं।

 राo

 2-3'''-7-6''-11''-12-5-10-1-8

o 

11'-1-8

सूo

3-5-6-10

 अन्तर्दशा मे भी 2 -6 - 10 - 11 - 5 प्रबल हैं अतः अन्तर्दशा भी भारत के पक्ष मे हैं और विपक्षी को कमजोर करती हैं और दोस्ताना वयवहार करने को प्रेरित करती हैं।

 शनि का प्रत्यंतर चल रहा हैं अतः वक्री शनि कोई भी आक्रामक कदम नहीं उठाने देंगे।

 अतः युद्ध होने  कि  सम्भावना ना के बराबर है।

 तीसरे भाव एवं नवे भाव के सबलार्ड शनि हैं जो वक्री हैं।  शनि विश्वास कायम नहीं होने देंगे और शनि तीसरे भाव एवं नवे भाव का सबलार्ड होने से झूठ  खबर भी दर्शाते हैं अतः इस प्रकरण मे दोनों पक्ष ही कई तरह की भ्रामक जानकारी से एक दूसरे को भ्रम मे रखने का प्रयास करेंगे।

 सितम्बर 2020 के बाद शुक्र महादशा मे बुध की अन्तर्दशा होगी जो परिस्थिति को सुगम करेगी और भारत को और शक्तिशाली रूप देगी।  

 सप्रेम

अनुरोध

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