रविवार, मार्च 29, 2020

मिथ्या २ : शिशु जन्म के लिए शल्य क्रिया का महूर्त निकालना | (Myth 2: selecting the time of cesarean section for child birth)


मित्रों, आजकल एक चलन है कि यदि डॉक्टर ने शिशु जन्म (child birth) के लिए गर्भवती (pregnant lady) को शल्य क्रिया (cesarean section) की सलाह दी है तो लोग ज्योतिषी से मिल कर महूर्त (elective surgery) निकलवाते हैं और यह काफी प्रचलित हो रहा है। 

क्या ऐसा करना संभव है



यह सही है कि आज प्रतिस्पर्धा  का युग है और, हर व्यक्ति की यह इच्छा होती है की उसकी संतान का जीवन उत्तम हो।  यह इच्छा शुभ है और स्वाभाविक है। परन्तु किसी को भी यह नहीं भूलना चाहिए कि  जीवन एवं मरण ईश्वर के हाथ है। जन्म प्रारब्धद्ध के अनुसार होता है। 

कई तरह के शोध कार्यों की, एवं शास्त्रों मे लिखी बातों का एक ही सार है कि, आत्मा का जन्म उसकी कार्मिक (karma) यात्रा का अंग है, और यह आत्मा का अपना चुनाव होता है कि  वह अपने जन्म मे क्या भोगना चाहती है क्योंकि, प्रत्येक आत्मा हर जन्म मे अपनी कार्मिक यात्रा मे सिर्फ आत्मबोध (self realization/ Self recognition) का अनुभव करती है और जन्म लेने का सिर्फ यही उद्देश्य है।

आज विज्ञानं अपनी परम् उचाईयों को छू रहा है।  मानव कितने ही असंभव तो संभव कर चुका है। और संभवतः यह मानव का दम्भ भी है कि,  अब वह इस ब्रह्माण्ड की महान व्यवस्था को नियंत्रित कर सकता है। इसके अनेको अनेक उदाहरण आज इसके साक्ष्य है जैसे, जेनेटिक इंजीनियरिंग के द्वारा वैज्ञानिक पौधों की संरचना मे कई मूलभूत परिवर्तन कर चुके हैं।  क्लोनिंग कर के जानवरों की उन्नत प्रजातियां तैयार की गई हैं।  आने वाले दिनों मे यह प्रयोग मनुष्य पर भी करने की तैयारी है और डिज़ाइनर बच्चे (designer children) भी जेनेटिक इंजीनियरिंग के द्वारा जन्म लेने को तैयार हैं। यह बात भी सही है कि  यह मानव के लिए वरदान है। परन्तु यदि मानव यह सोचता है कि  वह समय एवं प्रारब्ध को धता बता सकता है तो यह उसका भ्रम है।

जब यह बात तय है कि आत्मा अपने जन्म को अपने कर्मों के अनुसार ही तय करती है तो यदि महूर्त भी निकला जा रहा है तो भी जन्म लेने वाली आत्मा का चुनाव पूर्ण रूप से उसमे निहित है और, यह आध्यात्मिक रूप से संभव नहीं कि जन्म महूर्त के हिसाब से हो। यदि आत्मा का चुनाव एक विशेष जन्म के लिए निश्चित है तो ग्रह स्थिती उसके अनुसार ही होगी।

मेरे अनुभव मे अब तक एक ही ऐसा जन्म आया है जहाँ महूर्त के अनुसार शल्य क्रिया करा के जन्म हुआ है। अपने ज्ञान के अनुसार जन्मपत्री के विश्लेषण करने पर मुझको नहीं समझ आया कि ज्योतिषी ने उस समय मे क्या विशेष देखा जो उस समय को महूर्त निश्चित किया। संभवतः जन्म ज्यादा टाला नहीं जा सकता होगा तो उस समय के अनुसार जो भी तुलनात्मक महूर्त सही लगा होगा वह निश्चित किया होगा और, उनके पास कोई और विकल्प भी नहीं होगा। कुछ वर्ष पश्चात् उस बच्चे से सम्बंधित कुछ समस्या के लिए मुझसे संपर्क किया गया। और उस समस्या का हल न मिलने से परिवार परेशान भी था।  

इस घटना से मेरा विश्वास और दृढ हो गया कि मनुष्य नियति को नहीं काट सकता।  आज जिस सफलता का दम्भ भर रहा है वह भी नियति की ही देन है। ब्रह्माण्ड यह चाहता है कि  कई प्रकार की समस्या का समाधान मानव अपने वैज्ञानिक ज्ञान से करे और आगे भी यह ज्ञान और उचाइयां छुएगा परन्तु प्रारब्ध प्रबल है , कर्म (karma) प्रधान है और सदा आत्मा की अधत्यात्मिक यात्रा का कारक (factor) बनेगा ।

मेरी एक शिकायत ज्योतिषियों (astrologers) से भी है, जो इस प्रकार की सोच को पोषित (feeding the thinking) कर के ज्योतिष शास्त्र को कलंकित करते हैं तथा जनसामान्य मे भ्रम भी फैलाते हैं। और यह सब सिर्फ कुछ धन के लिए और अपना झूठा ज्ञान दिखने के लिए | जबकि वह पूर्ण रूप से जानते हैं कि, जन्म और मरण नियति द्वारा निश्चित है और, यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर  है।

अतः जीवन और मरण ब्रह्म के ही नियंत्रण मे है, मानव जन्म सिर्फ आत्मबोध के लिए ही होता है। किसी प्रकार का नियंत्रण मात्र अहंकार है और, अहंकार देर सबेर प्राग्ज्ञता (wisdom) मे परिवर्तित हो ही जाता है।

सप्रेम,
अनुरोध

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स्रोत :

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रविवार, मार्च 08, 2020

मिथ्या १ : दो व्यक्तियों के ग्रह एक दूसरे को प्रभावित करते हैं? (Myth 1 : Do two people impact each other astrologically?)


(इस लेख में दिए गए तथ्य मेरे अनुभव पर आधारित हैं। ज्योतिष विशषज्ञों का मत इस पर भिन्न हो सकता है। पाठक अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।)

कई बार इस प्रकार की बातें सुनने में आती हैं कि दो व्यक्तियों की जन्मपत्र (horoscope) मे ग्रह स्थिति (planetary positions) एक दूसरे को प्रभावित करती है। क्या यह बात सत्य है ?

यदि यह बात सत्य है तो कर्म (karma) की अवधारणा (concept) गलत सिद्ध हो जाती है।
हम सभी आत्मा (soul) हैं जो की शरीर धारण कर के इस पृथ्वी पर जन्म लेते हैं।  हम सभी स्वतंत्र हैं और स्वतंत्र रूप से ही कर्म करते हैं। इसीलिए कर्म का परिणाम भी स्वयं ही भोगना होता है। जन्म लेते समय हम इस जीवन के सभी सम्बन्ध भी चुनते हैं।

सम्बन्ध चुनते समय दो तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं :

 

१. क्या जिस आत्मा से हम सम्बन्ध बनाएंगे उस आत्मा से कोई कार्मिक सम्बन्ध है ? 

यदि हाँ तो इस जन्म मे वह कार्मिक सम्बन्ध हम उसे व्यक्ति के साथ निभायेंगे। उदाहरण के लिए , किसी जन्म मे किसी आत्मा ने मेरी मदद की थी, जिसको मै (एक आत्मा के नाते) एक ऋण (liability) मानता हूँ। हो सकता है इस जन्म मे उसका और मेरा नाता फिर बने किसी विशेष परिस्थिति मे मैं उसकी मदद करूँ।

२. क्या मेरा किसी सम्बन्ध विशेष से कार्मिक सम्बन्ध है ? 

 यदि हाँ तो इस जन्म में उस सम्बन्ध से मेरा कार्मिक भोग बनेगा। उदाहरण के लिए , देखने मे आता है कि कुछ लोगों की अपने अधिकारी (boss) से नहीं बनती। अब अधिकारी बदल भी जाये परन्तु कुछ समय के बाद नए अधिकारी से भी समस्या प्रारम्भ हो जाएगी।
इसी प्रकार स्थान, परिस्थिति एवं कई दूसरी चीज़ों से भी कार्मिक सम्बन्ध होते हैं। इनको हम कार्मिक अनुबंध (contract) कहते हैं।

विशेष बात यह है कि  जब हम किसी आत्मा के साथ कार्मिक अनुबंध करते हैं तो वह आत्मा भी अपने किसी कार्मिक कारण से हमसे अनुबंध करती हैं। ज्योतिष शाश्त्र मे इस प्रकार के कार्मिक अनुबंधों को समझने के कई विधियां हैं जो की एक अनुभवी ज्योतिष बता सकता है या तो सेरेनिटी सरेंडर (serenity surrender healing ) हीलिंग विधा से इसको जाना एवं समझा जा सकता है।

अतः जब जन्मपत्र (horoscope) विवेचना की जाती है और दो व्यक्तियों के सम्बन्ध देखे जाते हैं जैसे , वैवाहिक (marital), ससुराल पक्ष से सम्बन्ध (relationship with the in-laws), संतान से सम्बन्ध (relationship with children), व्यापार मे साझेदार से सम्बन्ध (relationship with the business partner), और इस जीवन के बाकि सम्बन्ध आदि।

यहाँ पर एक का जन्मपत्र (horoscope) दूसरे  व्यक्ति से सम्बन्ध के आधार पर ग्रह स्थिति दिखाएंगे। मान लेते हैं कि एक विवाह प्रस्ताव है और उसमे लड़की के जन्मांग (horoscope) मे पति कि  आर्थिक स्थिति (financial status) अच्छी है और उसका विवाह (marriage) एक लड़के से होता जो साधारण परिवार से है। विवाह के बाद वह लड़का प्रगति करने लगता है। अब लोग कहने लगते हैं कि वह लड़की लड़के के लिए बड़ी शुभ निकली। परन्तु गहन विवेचना (deep analysis) करने पर यह अवश्य दिखेगा कि लड़के के जन्मांग (horoscope) मे विवाह के बाद प्रगति का योग होगा। अतः दोनों का विवाह हुआ। लड़की की जन्मपत्र मे भी यह योग होगा की पति का परिवार माधयम वर्ग का होगा परन्तु पति का आर्थिक स्तर (financial status) अच्छा होगा।
इसी प्रकार अशुभ योगों की भी विवेचना होनी चाहिए। 

यह कहना गलत है कि किसी की ग्रह स्थिति दूसरे की ग्रह स्थिति को प्रभावित करती है। क्योंकि जब अच्छा होता है तब तो लोग प्रसन्न होते हैं परन्तु जब ख़राब होता है तो लोग दूसरे पर दोष डालते हैं।

सत्य यह है कि हमारे जन्मांग (horoscope) मे हमारे सम्बन्धियों की  स्थिति दिखती है उसी प्रकार हमारी स्थिति उनके जन्मांग (horoscope) मे दिखती है क्योंकि हर सम्बन्ध कार्मिक अनुबंध (karmic contract) है।

सप्रेम।                                       
अनुरोध।

ज्योतिषीय सलाह अथवा हीलिंग के लिए संपर्क करें krisa.advisor@gmail.com

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