नो होरोस्कोप एस्ट्रो गाइडेंस





ज्योतिष विद्या का नाम सुनते ही जन्मपत्री का ख्याल मन मे आता है। जन्मपत्री बनाने के लिए जन्म तारीख , जन्म समय , जन्म स्थान का सही पता होना आवश्यक है। कई बार यह जानकारी अधूरी या गलत होती है। उस स्थिति मे जन्मपत्री बनाना कठिन कार्य है।  हालाँकि ज्योतिष शास्त्र मे 'नष्ट जातकम' पद्धत्ति से इस प्रकार की समस्या को हल किया जा सकता है। जन्म समय , जन्म दिनांक शुद्धिकरण भी किया जाता है।

 

परन्तु ज्योतिष शास्त्र मे एक विधा है जिसको 'प्रश्न शाश्त्र' कहते हैं। इस विधा मे प्रश्नकर्ता सिर्फ प्रश्न करता है और उस प्रश्न से सम्बंधित एक कुंडली बना कर सटीक उत्तर दिया जाता है जिसकी सहायता से प्रश्नकर्ता अपनी योजना बना सकता है। किसी प्रकार की जन्म से सम्बंधित जानकारी की आवश्यकता नहीं होती है। प्रश्न अपने से सम्बंधित या अपने किसी भी सम्बन्धी या मित्र के लिए पूछा जा सकता है। प्रश्नकर्ता का समस्या से मानसिक जुडाव आवश्यक है अन्यथा प्रश्न का उत्तर सही नहीं आता है। अतः प्रश्न तभी पूछना चाहिए जब आप अपने प्रश्न से वैचारिक रूप से पूर्ण रूप से जुड़े हुए हों।

 

प्रश्न शाश्त्र मे भी कई विधा हैं। मैं कृष्णामूर्ति पद्धत्ति का प्रयोग करता हूँ। इसमे प्रश्न करने के बाद 1 से 249 के बीच मन से कोई संख्या बोलनी होती है।  फिर एक प्रश्न कुंडली बना कर प्रश्न का उत्तर पाया जाता है।

 

एक महत्वपूर्ण बात हमेशा याद रखनी चाहिए।  कभी भी ज्योतिष से संपर्क करते समय यह न सोचे कि उत्तर हमेशा वह आएगा जो आप सुनना चाहते हैं। ज्योतिष विद्या को ईश्वर की वाणी कहा गया है और, आप इस विद्या से मार्गदर्शन तभी ले सकते हैं जब परमात्मा चाहेंगे।

एक सच्चा ज्योतिष सिर्फ जो दिख रहा है वही बताता है।  वह आप को खुश करने का काम नहीं करता।

 

ज्योतिष हीलर मे मैं आपको मार्गदर्शन देने का प्रयास करता हूँ ताकि आप सही दिशा मे अपनी ऊर्जा , समय एवं धन लगाएं।

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