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सोमवार, अक्तूबर 12, 2020

ज्योतिष और उच्च शिक्षा

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ज्योतिष उच्च शिक्षा के चयन मे कैसे सहायक हो सकती है ?

 आज के समय में कौन ऐसा है जो सफलता नहीं चाहता। शिक्षा इस लक्ष्य को पाने मे बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
आज के प्रतिस्पर्धा के समय मे जब इतने सारे माधयम और विकल्प हैं तो सही चुनाव माता-पिता एवं छात्र के लिए एक चुनौती से कम नहीं है।

उच्च शिक्षा हर एक छात्र पाना चाहता हैं परन्तु उससे भी बड़ा लक्ष्य है कि परीक्षा मे अच्छे अंक आये ताकि प्रतिभा सूची मे भी उच्च स्थान आये और  आगे चलकर अच्छी नौकरी मिल सके या अपना वयवसाय भी करना हो तो सफलतापूर्वक कर पाएं।

जब लोग अपने बच्चों के विषय मे ज्योतिष के अनुसार जानकारी करना चाहते हैं तो मैने अनुभव किया हैं कि  लोग शायद ही कभी बच्चे के स्वास्थ के विषय मे प्रश्न करते हों। यहाँ तक की छोटा बच्चा जिसकी जन्म कुंडली अभी अभी बनाई गयी हैं वहां भी परिवारजन बच्चे की शिक्षा के विषय में प्रश्न स्वास्थ से पहले करते हैं या यदि ज्योतिषी खुद न बताये तो स्वास्थ के विषय मे विशेष नहीं पूछते। तो यह सिद्ध होता है की हम भारतियों के लिए शिक्षा सर्वोपरि है।

इस लेख मे मैं शैछिक स्तर पर ज्योतिष विद्या  की भूमिका पर संक्षेप में  प्रकाश डालूँगा।

ज्योतिष मे किसी भी वयक्ति का शैछिक स्तर क्या होगा यह तो पता चलता ही है साथ ही वह कितना बुद्धिमान होगा यह भी पता चलता है। यहाँ बुद्धिमान का तात्पर्य सीखने और समझने के क्षमता से है , और साथ ही स्मरण शक्ति का भी अनुमान लगाया जा सकता हैं। इस लेख मे किसी भी ज्योतिष तकनीक एवं नियम का उल्लेख नहीं करूंगा बल्कि जन्मकुंडली विवेचना कितनी सार्थक हो सकती है इस बात को केंद्र मे रखकर ही बात की जाएगी।

बात आगे करने से पहले यह भी बता देना चाहता हूँ कि कुछ जगह पर जन्म कुंडली नहीं होती, या जन्म से जुडी जानकारियां अधूरी या अशुद्ध होतीं हैं जैसे समय का सही पता न होना , दिनांक मे भ्रम होना इत्यादि। ऐसे लोगों के प्रश्न ज्योतिष से उत्तर देना संभव है और यह एक सटीक तरीका है।

 

शैक्षिक स्तर की विवेचना :-   

ucch shiksha higer education
ज्योतिष विद्या द्वारा जन्म कुंडली या प्रश्न कुंडली विवेचना से यह देखा जाता है कि  बच्चे मे विद्या का योग है कि नहीं। यह कोई आवश्यक नहीं है कि  यदि परिवार मे सब उच्च शिक्षित हैं तो बच्चा भी उच्च शिक्षित होगा या यदि सब अल्प शिक्षित हैं तो संतान भी कम पढ़ी लिखी होगी। विद्या का योग देखते समय जन्म कुंडली मे मानसिक ध्यान जिसका स्मरण शक्ति से सीधा सम्बन्ध है , समझने की शक्ति आदि कैसी है। जन्म कुंडली मे चंद्र, बुध, गुरु आदि की स्थिति बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।  यह भी आवश्यक है कि प्रथम भाव का स्वामी (लग्नेश) की स्थिति भी सुढ़ृड़ होनी चाहिए अन्यथा जन्मकुंडली के अच्छे योग भी सही ढंग से परिणाम नहीं दे पाते। तीसरे एवं पंचम भाव से बच्चे के मानसिक झुकाव एवं सोचने समझने की शक्ति का आंकलन किया जाता है।

शिक्षा मे चौथे भाव का बहुत महत्व है। इस भाव से जीवन सुख, माता , चल अचल संपत्ति, वाहन आदि का विचार करा जाता है और, शिक्षा का विचार भी इस भाव से होता है। यह भाव यह दर्शाता है कि क्या बच्चा शिक्षित होगा या नहीं , यानि विद्यालय जायेगा या नहीं। इस भाव का सम्बन्ध नवम भाव (उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान) से हो तो उच्च शिक्षा का योग बनता है। ग्यारवें भाव  से सम्बन्ध उच्च शिक्षा के  प्रबल योग बनाते हैं। तीसरा भाव , चौथा भाव , नवम भाव , ग्यारवा भाव एवं बारहवा भाव सम्बंधित हों तो विदेश शिक्षा के योग बनते हैं।

उपरोक्त विवेचना मे जो दूसरा महत्वपूर्ण भूमिका हैं वह महादशा और अन्तर्दशा की है।  छात्र जीवन मे महादशा और अन्तर्दशा यदि उपरोक्त भावों एवं / या  ग्रहों की हों तो बच्चा शिक्षा मे अच्छा प्रदर्शन करता है। यदि उपरोक्त भावों एवं ग्रहों का सम्बन्ध दसवे भाव (रोजगार एवं वयवसाय ) से हो तो बच्चा पढ़ने के बाद अपनी  उच्च शिक्षा से सम्बंधित क्षेत्र मे ही रोजगार या व्यापार करता है।

एक ज्योतिषी को बच्चे के स्वास्थ एवं आयु की मौन रूप से विवेचना कर लेनी चाहिए और बालारिष्ट योग और दूसरे अरिष्ट योगों का आकलन कर के ही फल कहना चाहिए।


शैक्षिक विषयों का चुनाव :-

शैछिक विवेचना से बड़ी कक्षा मे विषय के चुनाव मे भी बड़ी मदद मिल सकती हैं। पूर्ण विवेचना मे बच्चे के मानसिक बल , शिक्षा योग, मानसिक झुकाव एवं आने वाले समय मे दशा इत्यादि की विवेचन के आधार पर भ्रम की स्थिति काफी कम की जा सकती हैं।

छात्रों की दूसरी समस्यां :-

पढाई के साथ साथ आज छात्र कई और भी चीज़ों के संपर्क मे आने से ज्यादा जानकारी रखते हैं और कई तरह की गलत संगत और व्यसनों के भी शिकार हो जाते हैं।
कभी कभी छात्र का पढाई मे रुझान नहीं होता परन्तु और कई तरह की प्रतिभा उसमे होतीं हैं।

उपरोक्त सभी तरह की स्थितियों मे ज्योतिषीय विवेचना  मार्गदर्शन का काम कर सकती हैं। और समय रहते सही कदम उठा कर बच्चे को सही राह पर डाला जा सकता हैं।

नए अवसर :-

ज्योतिषी को भी नए नए क्षेत्रों और विषयों के बारे मे पढ़ते रहना चाहिए और ज्योतिष मे अनुसन्धान करते रहना चाहिए। आज बहुत सारे नए विषय और क्षेत्र हैं जिनका ज्योतिष ग्रंथों मे कोई उल्लेख नहीं है अतः यह अनुसन्धान का विषय है कि यह नए विषय ज्योतिष विवेचना के द्वारा माता-पिता को बताये जाएं  और सही मार्गदर्शन किया जाए।

बच्चों मे तनाव :-

आजकल बच्चे भी डिप्रेशन और तनाव के शिकार हैं। बच्चों की आत्महत्या के  कई  सारे समाचार सुनने को मिलते हैं। बच्चों का क्रोधी होना व , या गुमसुम रहना आदि सब मानसिक तनाव के लक्षण  हैं।

ज्योतिष इस क्षेत्र मे अग्रिम रूप से विवेचना कर के माता-पिता को सचेत कर सकती है।

ज्योतिष उपाय:-

जैसा की ज्योतिष उपाय के लेख मे मैं यह उल्लेख कर चुका हूँ कि  ज्योतिष कार्मिक गति नहीं बदल सकती परन्तु ज्योतिषीय उपाय कई तरह के  अनिष्ट से हमारी रक्षा करते हैं और अरिष्ट के प्रभाव को कम करते हैं।
यदि ज्योतिषी किसी प्रकार के उपाय के सुझाव दें तो यथा संभव बच्चे से करवाना चाहिए और अरिष्ट के प्रभाव को कम और शुभ प्रभाव को बढ़ाना चाहिए।

और अंत मे :-

जन्म कुंडली की सही विवेचना के आधार पर ही माता-पिता को अपने बच्चे से शैछिक अपेक्षा रखनी चाहिए। कभी भी मछली को दीवार पर चढ़ने की क्षमता नहीं आंके | दोनों की अपनी छमता हैं। हर बच्चा अनोखा है। उसे उसकी क्षमताओं के लिए सराहें और आगे अवसरों का लाभ उठाने लायक बनने मे सहायता करें। यही माता-पिता की सही भूमिका है।  सिर्फ अंकतालिका मे अच्छे अंक लाने की होड़ मे बच्चों के जीवन को दांव कर मत लगाएं।

सप्रेम |

यह भी पढ़ें :  शिशु जन्म के समय का मुहूर्त निकालना 

*****

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मंगलवार, अगस्त 25, 2020

ज्योतिष उपाय की सार्थकता

 Read this article in English

 

 मित्रों जब  आप किसी ज्योतिषी से परामर्श करते हो तो वह आपको कई तरह के उपाय बताते हैं , जिनमे रत्न , पूजा, दान , उपवास आदि क्रिया हो सकती हैं। कुछ लोग इस बात पर आशंकित होते हैं कि यदि यह निश्चित है कि  जो होना है वह होना ही है तो उपाय किस तरह से सहायता करेंगें  या कभी कभी यह भ्रान्ति भी होती है कि  उपाय करने से सब ठीक हो जायेगा और विपत्ति या विपरीत समय से छुटकारा मिल जायेगा।

इस लेख मे मैं अपने अनुभव के आधार पर कुछ सच्चाई लिख रहा हूँ।  इस लेख का आशय किसी भी ज्योतिष विद्वान के इस विषय मे अनुभव को चुनौती देना या गलत साबित करना नहीं है।  इस लेख का विषय आम व्यक्ति को ज्योतिष उपाय के विषय मे जागरूक करना है। 


इस लेख में मैं जिज्ञासु जन के द्वारा पूछे गए प्रश्नो को लेकर उनके उत्तर लिख रहा हूँ।

1 क्या ज्योतिष उपाय से जीवन बदल जायेगा ?

जन्मपत्री के विश्लेषण के पश्च्यात ही यह बताया जा सकता है आपके जीवन की  क्या दिशा है। ग्रह स्थिति , महादशा अंतर दशा , गोचर आदि की विवेचना के बाद ही यह सुनिश्चित होगा कि ज्योतिष उपाय कौन से करने श्रेयस्कर होंगे।
विवेचना के बाद ही यह बताया जा सकता है कि ज्योतिष उपाय से कितना लाभ संभव है।

2 अगर सब कुछ निश्चित है तो ज्योतिष उपाय का क्या लाभ ?

अगर बरसात हो रही है या तेज़ धूप  है तो छतरी का क्या लाभ ? लाभ है क्योंकि छतरी बरसात या धूप के प्रभाव को कम  करती है।
उसी प्रकार ज्योतिष उपाय भी विपरीत समय के प्रभाव को कम कर देते हैं यदि वह बताई गई विधि, लगन , श्रद्धा से लगातार किये जाए। ज्योतिष उपाय जादू नहीं करते परन्तु अपना शुभ प्रभाव अवश्य दिखाते हैं।

ज्यादातर लोग ज्योतिष परामर्श समस्या मे फसने के बाद लेते हैं और आशा करते हैं कि समस्या से छुटकारा मिल जाये।

प्रथम तो यह समझ ले कि विपरीत समय जबतक है तब तक रहेगा , कोई भी पूजा , अनुष्ठान , रत्न उस समय को काम या ज्यादा नहीं कर सकता क्योंकि इसका कार्मिक आधार है।  यदि ज्योतिष परामर्श नियमित लिया जाये तो यह उपाय एक ढाल कि तरह काम करते हैं। वैसे ही की पानी बरसने से पहले ही छतरी खोल लेना न कि पानी मे भीग जाने के बाद।  दोनों ही स्थिति मे छतरी अपना काम करेगी परन्तु आप  पर  प्रभाव अलग होगा।

ज्योतिष प्रभाव शुभ समय के अनुभव को बढ़ा देते हैं। शुभ समय भी निश्चित है और यह भी आएगा ही।  ज्योतिष उपाय निश्चित तौर पर शुभ अनुभव को बढ़ाते हैं।

3 ज्योतिष उपाय के विषय मे आप क्या राय देना चाहेंगे ?

मेरी राय मे ज्योतिष उपाय लगातार करना चाहिए यानि परामर्श के अनुसार यह उपाय प्रतिदिन करने से शुभ अशुभ प्रभाव पूरी तरह से अनुकूल रहते हैं।

4 मुझे एक ज्योतिषी ने अनुष्ठान बताये हैं , परन्तु वह बहुत ही मंहगे हैं। क्या मुझको करना चाहिए ?

यह आप पर निर्भर करता है कि आपका विश्वास कैसा है। कोई भी ज्योतिषी अपने अनुभव के बल पर ही ज्योतिष उपाय बताता है। अनुष्ठान आदि के खर्चे पर भी आपको ही निर्णय लेना होगा। परन्तु इस बात से आश्वस्त हो जाये कि जो भी उस अनुष्ठान या पूजा करा रहा है वह उसके विधि विधान का विशेषज्ञ हो।

5 आप किस प्रकार के ज्योतिष उपाय बताते हैं ?

ज्योतिष उपाय का पहला नियम है कि जो व्यक्ति परामर्श ले रहा है उसको सही स्थिति से अवगत करा देना आवश्यक है। स्थिति का सही ज्ञान देते समय यह भी आवश्यक है कि  व्यक्ति को संभावनाएं बताया जाए, उसको न ही  डराया जाये और न ही अत्यधिक आशावान बनाया जाए।
 
मैं बहुत ही सरल विधियां बताता हूँ जिनमे ज्यादातर चिड़ियों एवं जानवरों  को कुछ विशेष खाने की वस्तुएं देना, इष्टदेव की प्रतिदिन पूजा, चालीसा, स्त्रोत , आदि का पाठ हो सकता है जो की कोई भी व्यक्ति आराम से दैनिक दिनचर्या मे सम्मलित कर सकता है।

मैं ज्योतिष उपाय को प्रतिदिन करने पर जोर देता हूँ। यह स्थितियां अनुकूल रखते हैं। मन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

6 क्या रत्न पहने से लाभ मिलेगा ? वह बेहतर होते हैं ?

रत्न भी प्रभावशाली उपाय हैं परन्तु मैं रत्न सिर्फ शुभ ग्रह को शक्ति प्रदान करने के लिए ही पहने की सलाह देता हूँ। रत्न को शुभ महूर्त मे पहने से उसका प्रभाव बढ़ जाता है परन्तु यह भी निश्चित कर ले कि रत्न की गुणवत्ता अच्छी हो और आपके बजट मे हो।

7 यदि परिवार जन के लिए मैं उपाय करूँ तो क्या उसको लाभ होगा ?

यदि बीमार की जगह आप दवा लें तो क्या बीमार व्यक्ति को लाभ होगा ? नहीं होगा।  यही बात ज्योतिष उपाय पर भी लागू होती हैं।

छोटे बच्चे , अत्यधिक बीमार व्यक्ति जो चिकित्सालय मे भर्ती है, परिवार का सदस्य जो कुछ समय के लिए नगर से बाहर गया हो आदि परिस्थिति मे आप उपाय उनके नाम से कीजिये |

छोटे बच्चे के हाथ से वस्तु स्पर्श करा कर पशु पछियों को दें।  बीमार व्यक्ति यदि घर पर हैं तो भी हाथ से स्पर्श करा दीजिये।  यदि व्यक्ति जल्दी मे हैं और खुद नहीं कर सकते तो स्पर्श करके आप को दे दें और बाद मे आप उसको पशु पछियों को दे दीजिये।  प्रातः उपाय करने से लाभ होता है।

8 हीलिंग से क्या लाभ होता हैं ?

सेरेनिटी सरेंडर हीलिंग से हमारी कार्मिक यात्रा मे अर्जित कर्मों के प्रभाव को जाना जाता है और प्रभावशाली तरीके से उसको हील किया जाता है। हमारे आत्मिक विश्वास हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं और यदि उन विश्वास को समझ कर उनको सही विश्वास एवं विचार से बदल दिया जाये तो जीवन की बहुत सारी समस्या का हल निकला जा सकता हैं।

(सेरेनिटी सरेंडर  के लिए यहाँ क्लिक कीजिये)

अंत मे मै  यह कहना चाहूंगा कि आत्मविश्वास होना अच्छा है परन्तु ज्योतिष परामर्श आपका सही मार्गदर्शन करता  है।

जन्म कुंडली की विवेचना से यह भी बताया जा सकता है कि जिसको उपाय बताया जा रहा है वह उसको श्रद्धा पूर्वक करेगा या नहीं। और उपाय करने से कितना लाभ होगा।

इष्टदेव का ध्यान  , गुरु एवं  परिवार मे बुजुर्गों का आशीर्वाद और, अपना कर्म सही नियत से करना बहुत बड़ा उपाय है, और यदि आप कोई आध्यात्मिक साधना करते हैं तो उस साधना को और कीजिये। आध्यात्मिक साधना सभी तरह की परिस्थितियों को अनुकूल बनाती है और मनः स्थिति सकारात्मक रखती हैं और मनः स्थिति ही जीवन के परिणामों को प्रभावित करती हैं।  ज्योतिष उपाय मनः स्थिति को प्रभावित करते हैं।

शुभकामनाएँ,

अनुरोध

ज्योतिष हीलर की सेवाओं के विषय मे जानने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

How do astrological remedies help?

 इस लेख को हिंदी मे पढ़ें

 

Friends, if you consult an astrologer, then he tells you many remedies, in which gems, worship, donations, fasting etc. can be done. Some people are apprehensive that, if it is certain that what is to happen is going to happen,then  how will the remedies help or, sometimes there is confusion that taking measures will fix everything and will get the rid of the adversity.


In this article, I am writing some truth based on my experience. This article is not intended to challenge or prove any astrological scholar's experience in this subject. The objective of this article is to make the common person aware of the topic of astrological remedies.


In this article, I am writing answers to the questions asked by my clients.

1 Will astrological remedy change life?

Only after analyzing the horoscope, it can be told about the your life’s trends. Only after studying the planetary positions, mahadasha, antar-dasa, transit etc., it will be ascertained that which astrological measures will be best to take.
Only after deliberation can it be told how much benefit is possible from astrological remedy.


2 If everything is certain then what is the benefit of astrological remedy?

If it is raining or there is strong sunlight, what is the benefit of an umbrella? There is a benefit because an umbrella works to lower down the influence of rain or sunlight.
Similarly, astrological remedies also reduce the effect of the adverse phase  if it is done continuously by following the suggested method,with dedication and devotion. Astrological remedies do not do magic, but do show their auspicious effects in due course.

 Most people take astrological counseling after getting into the problem and hope to get rid of the problem.
First of all, understand that the adverse time will be there if it is indicated in your horoscope and, no worship, rituals, gems can work to reduce the duration of that time because it has a karmic base. If astrology consultation is taken regularly then these remedies work like a shield. In the same way, open the umbrella before it rains and not after getting soaked in water. In both the situations the umbrella will do its job but effect on you will be different.

Astrological effects enhance the experience of auspicious times. Auspicious time is also fixed and this too will come. Astrological remedies definitely enhance auspicious experience.

3 What opinion would you like to give regarding the astrological remedy?

In my opinion astrological remedy should be done continuously, that is, according to the advice, by doing this remedy daily, the auspicious inauspicious effects are optimized to a great extent.


4 An astrologer has told me the rituals, but they are very expensive. Should i do?

It depends on your faith. Any astrologer gives astrology solution only on the basis of his experience. You also have to decide on the expenses of rituals etc. But be assured that whoever is performing that ritual or worship should be an expert.

5 What types of astrological remedies do you suggest?

The first rule of astrological remedy is that, it is necessary to make the person aware of the situation. While giving accurate knowledge of the situation, it is also necessary that the person be told about the possibilities, that he should neither be intimidated nor made euphoric.

I tell simple methods in which some special food items are given to the birds and animals, there can be daily worship of the ishtadeva, chalisa, strota, etc. which any person can comfortably incorporate into the daily routine. I see the comfort level of the person in doing the suggested remedies

I insist on doing astrological remedy daily. The conditions are optimized this way and have a positive impact on the mind too.


6 Will wearing gems benefit? Are they better?

Gems are also effective remedies, but I recommend wearing gems only to provide strength to the auspicious planet(s). Wearing a gemstone in auspicious time increases its effectiveness, but also ensure that the quality of the gemstone is good and in your budget.


7 If I do the remedies for the family, will it benefit them?

If you take medicine instead of sick, will the sick person benefit? The answer is NO. The same thing applies to astrological remedies as well.

In case of very young children, highly ill persons who are admitted in the hospital, family member who have gone out of the city for some time, you should do remedies in their name.

8 What are the benefits of healing?

Serenity surrender healing modal helps us to understand our karmic makeup and the reasons for the various issues of the life. In this healing modal the belief system which actually manifests our physical reality is healed and thus our thought process, attitude are transformed and thus our life issues too head towards the solutions in the highest best of all.

(To know more about Serenity Surrender, kindly click here)

In conclusion, I would like to say that it is good to have self confidence but astrological counseling gives you the right guidance which compliments your self confidence.

It can also be told from the horoscope that the person who is being told the remedy will do it or not. And how much benefit will come from doing those remedies.

The blessing of the elders, guru, family wishes and, doing your deeds with proper intention are the great solutions and, if you do any spiritual practice then do that to make it more stronger. Spiritual practice adapts to all kinds of circumstances and keeps the thoughts positive and it affects the results in life. Astrological remedies  facilitates a positive mindset.

With good wishes,

Anurodh

To know more about the Jyotish healer services, please click here

 

बुधवार, जुलाई 08, 2020

Indo - China : Is there a war?





Defense forces of India and China are face to face in Ladakh. The question in everyone's mind is, will there be war?

Many predictions were made on solar eclipse that the condition of war is very strong. I wished to know this question also in my mind.

On 24th June, 2020, through the question astrology, the horoscope of this question was seen and the answer came as follows:

The Indian position is quite strong, especially in the international arena. India is on the offensive but will not make any offensive action. Anyway, India has a national policy of not attacking first in war. The planets show the restrain on aggression in Indian attitude.
With this, China will also look aggressive but it will not be able to take any step towards India. China will try to tarnish the image of India but it will not succeed.


In the question chart, Ve mahadasa, Ra antardasa, Sa pratyantar is running. Sa is retrograde and will remain so till September 24, 2020.
Circumstances will remain same, but there will no full scale war. The situation is likely to return to normalcy after September.

No chance of  full scale war between Indian and China.


For those who know KP Astrology, a brief analysis is given here;



Following is the description of the question;

KP Number = 13
Date = 26 June 2020
Time = 20 hrs 39 min 50 sec
Day = friday
Location = Greater Noida West, Uttar Pradesh (77 deg 25 min E, 28 deg 25 min N)
Software = Jyotish Deepika

As it was a question for the country, the lagna was considered a India.

1. The lagna sublord is Ma which is in the constellation and sub of Sa. Saturn is retrograde. The signs of Ma is Pisces which is water element dual natur sign thus makes sensitive and arrests the aggression of Ma.

Ma
11'-1-8
Sa (r)
10 '' - 11-2-3-4'-9-8-12
Sa (r)
10 '' - 11-2-3-4'-9-8-12

8 - 12  show the strength of the opposition and losses to the first party ; India. But 11 - 1 -10 "- 2 make Ma a strong. So the position of India is strong but Sa (r) will not allow any aggressive (war related) action.

2. The seventh house represents the opposition. If 8 - 12 signify in the 7th sublord, then the opposition will be strong and may become the attacker. Here oppostion is China.
The 7th sublord is Ve. Ve is a beneficial planet but sits in its own sign Taurus. Taurus has earth element, so practical behavior is seen. This sign looks aggressive like bull and often does not take aggressive steps on its own.
Therefore, China will also show aggressive attitude and will intermittently scare and intimidate India.


Ve
1'-2-7'-5
Mo
5-4-2
Ma
11'-1-8

Here too, there are 5 -11 who signify friendship (here in war-related subjects, they greatly reduce the chance of attack). Ve, Mo are sitting on aggressive signs; Taurus and Leo and Ma is sublord then China’s attitude will be aggressive but it is very difficult to make up the mind to attack India

Venus is also a Mahadasha lord, so the possibility of war is minimum.
The antardasa belongs to Rahu.

Ra
 2-3 '' '- 7-6' '- 11' '- 12-5-10-1-8
Ma
11'-1-8
Su
3-5-6-10

Antardasha also signifies 2 -6 - 10 - 11 - 5, so Antardasha is also in favor of India and weakens the opposition (China) and inspires friendly behavior.

Sa is retrograde, therefore, Sa will not allow any aggressive step.

Therefore, there is no chance of full scale war.

The sublords of the third house and the ninth house are Sa, which is retrograde. Sa will not allow the faith to be established between both the nations/governments and Sa is a sublord of the third house and the ninth house thus shows false news, so in this case both the sides will try to confuse each other with many misleading information and propaganda.

After September 2020, Ve in Mahadasha and atardasa of Mercury will commence which will ease the situation and give India a more powerful position.

with love,
Anurodh

शुक्रवार, जून 19, 2020

How can Astrology help in Stock Market?


इस लेख को हिंदी मे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये 

There are two types of thoughts on hearing the name of the share market. The first; It is very dangerous, money is lost and secondly it is a powerful and fast way of growing money.


If we look around, we get people with both types of thoughts. Even we must be agreeing with either of the thought. It is true that if you invest with information in the share market, then there can be profit. But many times it has come to notice that some people always make money in this market and some people lose it.


Sometimes at the encouragement of their acquaintance, some people invest in share market and burn fingers. Most of these people lose money in trading. There are some people who wait for the stock to grow, but when they go to sell, they do not get the profit they should have got.
Stock market bull and bear

On the internet and in newspapers many types of information are published about the kind of ups and downs may the stock market undergo in future and people also benefit from that information. But few people are able to take advantage of such information. It is also often seen that when a stock is getting at a good price and may earn profit in future, but then there is not enough money to buy and, when there is money, the stock market is bullish on the day of purchase. On the second day, the stock or the entire market starts to follow a downward trend.


Astrology has a lot of say in this field. In olden times, astrology was very much used for speculation of grains and bullion. It is still consulted today. Lottery, horse race etc. are also not untouched by this learning. Many people due to greed note the daily trend from astrologers, make some small/short term profits and in this way, they are enthusiastic to make big investments and make losses.

I am not critisizing any astrologer here, but I am warning for those ignorant astrologers who mislead in this way. A knowledgeable astrologer would never give such advice.


Then what should we do?

If you want to invest in a stock market or want to trade, then get your horoscope discussed with a knowledgeable and experienced astrologer. He should see whether you will benefit from the risky investments like share market or not. If it is, then Mahadasha, Antardasha, Transit etc. should be advised to guide an appropriate time.

In case of not having a birth chart, it can also be known from the question horoscope that investing in a share market will be good or not.

If the horoscope does not have the benefit of profit from share market or betting etc. then no one will be able to get benefit from worship, advice, gem, yantra, mantra etc. There may be a momentary gain, but the total will be a loss. I am saying this based on my experience. Rather these rules are suitable for every type of business.

Investing in the stock market for long term is beneficial, which is a proven thing, but if the horoscope indicates weak combination then there is no expected growth.  In the stock market there is a huge risk and astrology can help to avoid this risk.

Astrologically Yours

Anurodh

contact: krisa.advisor@gmail.com

(pic courtesy: www.pixabay.com)

शनिवार, मई 30, 2020

No Horoscope Astro Guidance






On hearing the name of astrology, the idea of ​​a birth chart comes to mind. To make a horoscope, it is necessary to have the correct information of date of birth, time of birth, place of birth. Sometimes this information is incomplete or incorrect. In that case it is difficult to make a horoscope. However, in astrology, this type of problem can be solved by 'Nasht Jatakam' method. Time of birth, date of birth, rectification is also done.

 

There is a genre in astrology which is called 'Prashna Shastra (Question Astrology). In this mode, the questioner only asks the question and an accurate answer is given by making a horoscope related to that question with the help of which the questioner can make his plan. No information related to birth is required. The question can be asked about himself or any of the relatives or friends. The questioner's mental involvement with the problem is necessary; otherwise the answer to the question would not be correct. Therefore, questions should be asked only if you are ideologically fully connected to your question.

There are many genres in question scripture too. I use the Krishnamurti Paddhatti (KP astrlogy). After doing question in it, a number has to be spoken from 1 to 249 in mind. Then the answer to the question is found by making a question chart.

One important thing should always be remembered. Never, while contacting astrology, think that the answer will always be what you want to hear. Astrology has been called the voice of God and, you can take guidance from this knowledge only when God desires.
A true astrologer only tells what is visible. He does not work to please you.


In Jyotish Healer, I try to guide you so that you put your energy, time and money in the right direction.
 

Do you have any question to ask right now? Click here
Good wishes,
Anurodh

 

contact : krisa.advisor@gmail.com

सोमवार, अप्रैल 27, 2020

ज्योतिष विद्या की कार्य प्रणाली क्या है ? (How does Astrology work?)


इस ब्लॉग पोस्ट को अंग्रेजी मे इस लिंक पर पढ़े https://divine-route.blogspot.com/2020/04/astrologyfunctioning.html

इस लेख मे मैं संक्षेप मे ज्योतिष की कार्य प्रणाली पर अपने विचार लिख रहा हूँ और, यह विचार सनातन विचारधारा से  ही सम्बंधित है।

 इस ब्रह्माण्ड मे जो भी हमको हमारी भौतिक आँखों द्वारा दिखाई देता है और हमारी ज्ञाननेद्रियों (sense organs) द्वारा जाना समझा जा सकता है वह साकार (form) है। विज्ञानं साकार का ही अध्यन करता है। अतः जो भी हमारी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा जाना समझा नहीं जा सकता उसको विज्ञानं नकार देता है।  यह सही है और तर्क विज्ञानं की कसौटी है।

 इस ब्रह्माण्ड मे एक अदृश्य लोक भी है जिसे ज्ञाननेंद्रियाँ जान या समझ नहीं सकती और यह निराकार (formless) है। शास्त्रों मे ईश्वर / परमात्मा को निराकार बताया गया है। निेराकार का अनुभव हम सब करते रहते हैं।  उदाहरण ; जन्म से पहले  हम कहाँ थे ? मरण के बाद हम कहाँ जाते हैं ?

सबसे बढ़ा निराकार का साक्ष्य स्वप्नों मे है।  हमे कई बार भविष्य विषयक सपने आते हैं और वह सही भी साबित हो जाते हैं।  सोचने वाली बात है कि  जो घटना घटी नहीं वह सपने मे कैसे दिख जाती है?

 निराकार को विज्ञान नहीं मानता क्योंकि इसको साक्ष्य द्वारा सिद्ध नहीं किया जा सकता।

 निराकार अध्यात्म (spiritual) का विषय है, अनुभव का विषय है , साक्ष्य स्वयं ही प्रस्तुत हो जाता है।  ऐसा अनुभव किया गया है कि, कोई भी घटना अदृश्य रूप मे पहले ही घट चुकी होती है। साकार मे वह बाद मे आती है जब हम उसका होना देखते हैं  और साक्षी बनते हैं। साकार रूप निराकार के बिना संभव ही नहीं है।

यदि ऐसा नहीं होता तो ऋषि मुनि त्रिकालदर्शी नहीं हो सकते थे। विश्व मे बहुत महान भविष्यवक्ता (Futurologist) हुए हैं, वह कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकते थे ।  सनातन धर्म मे भविष्य पुराण की रचना कई हज़ार वर्ष पूर्व हो चुकी थी और उसकी कई बाते आज तक सत्य सिद्ध हो चुकी हैं। यह सब  तथ्य (facts) निराकार के साकार रूपांतरण के साक्ष्य (evidence) है। हमारे सारे विचार भावनाएं आदि निराकार है।

 ज्योतिष विद्या निराकार को अध्यन  करके साकार रूप मे उसके स्वरुप को बताती है।

 निराकार अध्यात्म (spiritual) का विषय है, अनुभव का विषय है , साक्ष्य स्वयं ही प्रस्तुत हो जाता है।  ऐसा अनुभव किया गया है कि कोई भी घटना अदृश्य रूप मे पहले ही घट चुकी होती है। साकार मे वह बाद मे आती है जब हम उसका होना देखते हैं  और साक्षी बनते हैं। साकार रूप निराकार के बिना संभव ही नहीं है।

यदि ऐसा नहीं होता तो ऋषि मुनि त्रिकालदर्शी नहीं हो सकते थे। विश्व मे बहुत महान भविष्यवक्ता (Futurologist) हुए हैं, वह कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकते थे ।  सनातन धर्म मे भविष्य पुराण की रचना कई हज़ार वर्ष पूर्व हो चुकी थी और उसकी कई बाते आज तक सत्य सिद्ध हो चुकी हैं।

 ज्योतिष विद्या निराकार को अध्यन  करके साकार रूप मे उसके स्वरुप को बताती है। आत्मा (soul) निराकार है। आत्मा की कार्मिक यात्रा मे संचित कर्म (accumulated karma) जो प्रराब्ध बनाते हैं, उसी प्रारब्ध के ही परिणाम स्वरुप जन्म एवं जीवन काल  का आरम्भ होता है। हर जन्म मे आत्मा अपने प्रेम रूप को पहचानने की प्रक्रिया मे है। जन्म के समय की ग्रह स्थिति, जो की आत्मा द्वारा चुने गए कर्म के भोग को जो सुख और दुःख दोनों ही वर्गों  मे विभाजित किये जा सकते हैं, जन्म कुंडली के रूप मे अध्यन किये जाते  है।  अतः जन्म कुंडली की गृह स्थिति उस निराकार का अध्यन है जो जीवन काल मे साकार रूप मे आएगा।

 आगे के लेखों मे मैं कुंडली के अध्यन की सार्थकता एवं कर्म भोग पर प्रकाश डालूंगा। ज्योतिष उपाय की सार्थकता एवं उनकी  हमारे जीवन मे क्या भूमिका है, इस पर हम चर्चा करेंगे।

 सप्रेम।

अनुरोध

 संपर्क ; krisa.advisor@gmail.com

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